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रबींद्रनाथ टैगोर – कुछ अनकही बातें

रबींद्रनाथ टैगोर – कुछ अनकही बातें

अगर कोई आपसे पूछे कि भारत का राष्ट्रगान किसने लिखा है, तो आपका तुरंत जवाब होगा, ‘रबींद्रनाथ टैगोर’। लेकिन अगर आपसे पूछे कि बांग्लादेश का राष्ट्रगान किसने लिखा है, तो क्या आप जवाब दे सकेंगे? शायद कम लोग होंगे कि बांग्लादेश का राष्ट्रगीत लिखने वाले भी रबिंद्रनाथ टैगोर ही थे।

– रबींद्रनाथ टैगोर, दुनिया के एकमात्र लेखक हैं, जिन्होंने एक नहीं बल्कि दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखा है।

-लोग उन्हें प्यार से गुरुदेव बुलाते थे।

-वह एक पॉलीमैथ, यानि बहुत ही ज्ञानी व्यक्ति थे, जिन्होंने साहित्य और कला को एक साथ नई दिशा दिखाई।

-साल 1913 में टैगोर साहित्य के लिए नोबल पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय बनें।

क्या थे पसंदीदा काम?

रबींद्रनाथ टैगोर को छुट्टियां मनाने के लिए हिमालय पर जाना बेहद पसंद था। यह 1903 की बात है, जब उनकी बेटी रेणुका को टीबी की बीमारी हो गई थी। उसे साफ हवा में रखने के लिये रबींद्रनाथ रामगढ़ ले गये। हालांकि वहां जाकर रेणुका की हालत पहले से ज़्यादा खराब हो गई, इसी वजह से उन्हें वापस आना पड़ा। इसके बाद पहाड़ों की खूबसूरती के बीच उन्होंने ‘शिशु’ को जन्म दिया।

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-टैगोर की कविताओं का कलेक्शन था ‘शिशु’ में।

-साल 1914 में अपनी बेटी के गुज़र जाने के बाद वह एक बार फिर रामगढ़ लौट आये और कविताओं के एक और संग्रह ‘गीतांजली’ के कुछ भाग लिखे।

-गीतांजली ही वह कलेक्शन है, जिसके लिए टैगोर को नोबल प्राइज़ मिला।

रबींद्रनाथ टैगोर – कुछ अनकही बातें
‘शांतिनिकेतन’ ज्ञान की पाठशाला  | इमेज: फाइल इमेज

-टैगोर के जीवन से जुड़ी कई कीमती चीज़ों को ‘शांतिनिकेतन’ के उत्तरायन कॉप्लेक्स में रखा गया था। यह वही जगह है, जहां उनका नोबल मेडल भी रखा गया था, जो साल 2004 में चोरी हो गया था।

-टैगोर के 100वें जन्मदिन पर ‘नोबल फाउंडेशन’ ने उनके सम्मान में एक नया मेडल इशू किया।

कुछ अनजानी बातें

टैगोर 13 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और क्लासरूम स्कूलिंग से हमेशा दूर भागते थे। उन्हें फॉर्मल एजुकेशन से इतनी चिढ़ थी कि वह केवल एक दिन ही लोकल प्रेज़िडेंसी कॉलेज गए थे।

-टैगोर के बड़े भाई ‘हेमेंद्रनाथ’ उनको पढ़ाते थे।

-हेमेंद्रनाथ ने ही उनको जिम्नास्टिक, जूडो और रेसलिंग सिखाई।

-ट्रैकिंग और पहाड़ों से प्यार भी टैगोर को हेमेंद्र का दिया तोहफा है।

टैगोर ने जब कवि के रूप में शुरुआत की, तो उन्होंने ह्यूमन सोल और डिवाइन, मतलब मानव-आत्मा और परमात्मा को समझने की अपनी खोज में आध्यात्म और रोमांस को मिक्स किया। लेकिन कुछ ही समय बाद वह दबे- कुचले लोगों की आवाज़ बनकर आगे बढ़ने लगे। उनके काम में आया बदलाव आपको आसानी से दिख सकता है।

साहित्य और संगीत में रुचि रखने वाले लोगों के लिए टैगोर केवल एक आर्टिस्ट या इंस्पिरेशन मात्र नहीं हैं, वह तो एक सोच हैं, जिसने अपने ही ढ़ंग से लोगों के अंदर परिवर्तन लाया।

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