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स्कूल में बच्चों को मिला – वॉटर ब्रेक

स्कूल में बच्चों को मिला – वॉटर ब्रेक

  • कर्नाटक के स्कूलों में बच्चों को पानी पीने के लिए “वॉटर बेल” से किया जा रहा प्रेरित
स्कूल में बच्चों को मिला - वॉटर ब्रेक

बच्चों को खाना पीने का कोई ध्यान नहीं रहता है। खेलकूद और अन्य गतिविधियों में बच्चे इतने बिज़ी रहते हैं कि उन्हें भूख और प्यास तक का पता ही नहीं चलता। स्कूल में छोटे बच्चे अक्सर कम पानी पीते हैं। इसका असर उनकी सेहत पर पड़ता है। इसी बात को ध्यान रखते हुए कर्नाटक के एक स्कूल ने बच्चों के लिए वॉटर बैल का इंतज़ाम किया है।

डिहाइड्रेशन से बच्चे पड़ते हैं बीमार

आजकल का बदलता मौसम बच्चों को बीमार कर रहा है। कभी सर्द तो कभी गर्म मौसम होने के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारियां लोगों को परेशान कर रही है। इसकी चपेट में सबसे पहले बच्चे आते हैं। बच्चों में ज़्यादातर बीमारियां कम पानी पीने और डिहाइड्रेशन से होती है। इसलिए इस बदलते मौसम को ध्यान में रखते हुये केरल के स्कूल ने ऐसी पहल शुरु की है, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी न हो।

स्कूल में आती थी शिकायत

इसकी शुरुआत कर्नाटक के दक्षिणा कन्नड़ के इंद्रप्रस्थ स्कूल में पैरेंट्स की शिकायतों से शुरु हुआ। पैरेंट्स ने स्कूल मैनेजमेंट से शिकायत करते हुए कहा कि जब उनके बच्चे घर पहुंचते हैं, तब उनके वॉटर बॉटल में पानी बचा रहता है।  यानी बच्चे दिनभर में आधा लीटर पानी भी नहीं पीते। तब स्कूल मैनेजमेंट ने पैरेंट्स की बात को गंभीरता से लेते हुये इस पर काफी विचार किया और फिर शुरु की एक अनोखी पहल, जिससे बच्चे समय – समय पानी पियें।    

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बच्चों में पानी की कमी करें दूर |इमेज : फाइल इमेज

स्कूल में बजती है वॉटर बेल

इस पहल में स्कूल समय में तीन बार घंटी बजाई जा रही है। घंटी बजने के बाद बच्चों को पानी पीना होता है। इस समय पर क्लास की टीचर मौजूद होती है। पहली बार सुबह 10.35 पर, दूसरी दोपहर में 12 और तीसरी 2 बजे बजती है। ‘वॉटर बेल’ की इस पहल से उनमें काफी पॉज़िटिव असर देखने को मिल रहा है।

बच्चों को सिखाएं पानी पीने का महत्व

पानी पीने के फायदों की जानकारी बच्चों को दें।

उन्हें बार-बार पानी पीना याद दिलाएं।

पानी की मात्रा वाले आहार दें।

पानी धीरे-धीरे पीना सिखाएं।

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