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विश्व पर्यटन दिवस- बहुत खास है दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली

विश्व पर्यटन दिवस- बहुत खास है दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली

विश्व पर्यटन दिवस- बहुत खास है दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली

हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस यानी वर्ल्ड टूरिज़्म डे मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1980 में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने की थी। इस दिन को मनाने का उद्देशय दुनियाभर में पर्यटन को बढ़ावा देना और लोगों को इसकी अहमियत समझाना है। वैसे देखा जाए तो तनावपूर्ण जिंदगी से राहत पाने के लिये यात्रा से बेहतरीन दवा और कोई नहीं है। चलिए वर्ल्ड टूरिज़्म डे के मौके पर आपको बताते हैं भारत के एक ऐसे खूबसूरत द्वीप के बारे में जो बहुत मशहूर भले न हो, लेकिन बहुत खास ज़रूर है।

सबसे बड़ा नदी द्वीप है माजुली

असम के जोराहट जिले में स्थित माजुली ब्रह्मपुत्र नदी के बीच करीब 875 वर्ग किलोमीटर के एरिया में फैला है। 2016 में इस द्वीप का नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप के रूप में दर्ज किया गया। माजुली को 2016 में ही अलग जिला भी बना दिया गया। माजुली में आपको प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव होगा। ब्रह्मपुत्र के खूबसूरत नज़ारों के साथ ही यहां आप वैष्णव मंदिर भी देख सकते हैं। दरअसल, माजुली असम के नव वैष्णव संस्कृति का मुख्य केंद्र है। यहां कला और संस्कृति खूब फली फूली है। यहां हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का झुंड आता है, जिसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिये तो यह खास आकर्षण का केंद्र है।

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प्राकृतिक वातावरण देता है सुकून |इमेज : फाइल इमेज

क्या है खास?

जब कभी आप इस सबसे बड़ी नदी द्वीप आने की प्लानिंग करें, तो ब्रह्मपुत्र नदी में बोट राइड का आनंद ज़रूर उठाएं। खूबसूरत प्राकृतिक वातावरण में बोट राइडिंग आपके लिये यादगार अनुभव बन जायेगी। यह जगह फोटोग्राफी के लिये भी बेस्ट भी है। माजुली में आप कयाकिंग और पैरासेलिंग भी कर सकते हैं। इस छोटे से द्वीप में आकर आपको असम की कला और संस्कृति के बारे में करीब से जानने का मौका मिलेगा। माजुली में आप नदी में मछली पकड़ने का भी मज़ा ले सकते हैं।

करें इन जगहों की सैर

माजुली द्वीप में तेंगापानिया नामक एक स्पॉट ब्रह्मपुत्र नदी के नजदीक स्थित है, जो मशहूर पिकनिक स्पॉट है। यहां से आप ब्रह्मपुत्र नदी के सुंदर नज़ारे देख सकते हैं। इसके अलावा कमलाबारी सत्र ज़रूर जायें। यह संस्कृति, साहित्य, कला और संगीत का केंद्र है। माजुली में दखनपत सत्र नाम का एक स्मारक जो अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। साथ ही आप सामागुरी, गरमूढ़, आउनीआटी, बेंगनाआटी सत्रों की भी सैर कर सकते हैं। माजुली द्वीप जोराहट शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जोराहट पहुंचने के बाद आप बस या टैक्सी से माजुली जा सकते हैं। यात्रा जीवन से तनाव दूर करके उसे नई ऊर्जा से भर देती है, तो साल में कम से कम एक या दो बार आप भी अपने परिवार के साथ किसी खूबसूरत जगह की सैर पर निकल जायें।

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