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अध्यात्म से जुड़े भ्रम और सच्चाई

अध्यात्म से जुड़े भ्रम और सच्चाई

अध्यात्म को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं और उलझन हैं। कुछ लोग इसे धर्म से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ को लगता है कि अध्यात्म का मतलब होता है पारिवारिक ज़िम्मेदारियों से मुक्ति, तो कुछ इसे कमज़ोर लोगों का रास्ता मानते हैं। अध्यात्म को लेकर कई तरह के झूठ को लोग सच मानने लगे हैं, चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ मिथकों की सच्चाई।

मिथक – आध्यात्मिकता व्यक्ति को पारिवारिक ज़िम्मेदारियों से दूर कर देती है।

महात्मा बुद्ध और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों को उदाहरण देकर कुछ लोग ऐसा कहते हैं, लेकिन यह सत्य नहीं है। अध्यात्म से जुड़ने के लिए आपको परिवार या ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ने की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि परिवार में रहकर ही तो अध्यात्म की असल परीक्षा होती है। जब आसपास कोई ध्यान भटकाने वाला होगा ही नहीं तब तो आप आसानी से अध्यात्मिकता के मार्ग पर चल सकते हैं और मन को शांत रख सकते हैं, लेकिन लोगों और ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए मन को शांत रखना असली आध्यात्मिकता है।

मिथक- निष्क्रिय जीवनशैली वालों के लिए आध्यात्मकिता उपयुक्त है।

बहुत अधिक सक्रिय जीवनशैली वाले अति महत्वकांक्षी लोगों को लगता है कि अध्यात्म का रास्ता उनके लिए नहीं है। यह बोरिंग और निष्क्रिय जीवन जीने वालों के लिए है, जो चुपचाप बैठकर बस आनंद से मुस्कुराते रहते हैं। जबकि यह सच नहीं है आध्यात्मिकता जीवन को और सक्रिय करती है और आपको अधिक मज़बूत, गतिशील और बुद्धिमान बनाती है जिससे व्यक्ति अपना काम बेहतर ढंग से कर पाता है।

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मिथक- वर्तमान समय में आध्यात्मिकता व्यवहारिक नहीं है।

अध्यात्म से जुड़ा यह एक और भ्रम है। कुछ लोगों को लगता है कि आज की व्यस्त जीवनशैली में जब व्यक्ति अपने करियर और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों में ही उलझा रहता है, अध्यात्म के लिए समय नहीं निकाल सकता। जबकि योग सिखाने वाले प्रशिक्षकों का मानना है कि अध्यात्म को ज़िंदगी में अलग से जोड़ने की ज़रूरत नहीं होती है। बस वर्तमान जीवनशैली में छोटे-मोटे बदलाव करके आप अध्यात्म के मार्ग पर चल सकते हैं। अध्यात्म आपको जीवन से भागना नहीं, बल्कि उसे बेहतर और संतुलित बनाना सिखाता है। इसके साथ ही यह आपको वर्तमान में जीना सिखाता है।

मिथक- अध्यात्म सिर्फ बुजुर्गों के लिए है।

इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अध्यात्म की शुरुआत के लिए कोई तय उम्र सीमा नहीं होती। यह कोई भी कर सकता है, बल्कि कम उम्र से ही इसकी शुरुआत करना अधिक फायदेमंद होता है। अध्यात्म में योग और मेडिटेशन का भी समावेश होता है जो आपके शरीर और मन को स्वस्थ रखता है। ऐसे में यदि आप जितनी जल्दी इसका अभ्यास शुरू करेंगे आपको उतना ही अधिक फायदा होगा और आप शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहेंगे।

अध्यात्म कोई चीज़ नहीं है जिसे आपको ज़िंदगी में अलग से जोड़ना है, बल्कि यह एक तकनीक है जो आपको खुद को जानने और आंतरिक शांति पाने में मदद करती है।

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