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कहानीः बिना जताये की मदद

कहानीः बिना जताये की मदद

कहानीः बिना जताये की मदद

बात करीब 15 साल पुरानी है, जब मैं* बैंगलुरु के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रही थी। मेरे फाइनल एग्ज़ाम पास आ रहे थे, इसलिए पढ़ने के लिए मैं अक्सर लाइब्रेरी चली जाती थी। हर रोज़ की तरह उस शाम भी मैं लाइब्रेरी से अकेले लौट रही थी, फर्क सिर्फ इतना था कि उस दिन थोड़ी ज़्यादा देर हो गई थी। गर्ल्स होस्टल लाइब्रेरी से कुछ मील की दूरी पर था, इसलिए मैने शॉर्ट-कट ले लिया। हालांकि उस रास्ते पर छोटी-छोटी कुछ दुकानें थी, लेकिन आस-पास ज़्यादा लोग नहीं दिख रहे थे।

थोड़ा सा आगे चली, तो मैंने महसूस किया कि कुछ लड़के मेरा पीछा कर रहे थे। हालांकि वह स्थानीय भाषा में बात कर रहे थे, लेकिन मुझे महसूस हुआ कि मुझे परेशान करने के लिये शायद वे कुछ उल्टा-सीधा कह रहे थे। मैं उनसे उलझना नहीं चाहती थी, इसलिए चुपचाप आगे बढ़ती रही। थोड़ा सा और आगे बढ़ी तो किसी ने मुझे आवाज़ लगाई, ‘मैडम! ज़रा रुकिये…. आपने जो समान मंगवाया था, वो आ गया है।’ मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी कि यह क्या हो रहा है।

कहानीः बिना जताये की मदद
अनजान ने दिलाया भरोसा  | इमेज: फाइल इमेज

शायद दुकानदार मुझे कोई और समझ रहा था। दुकानदार ने मेरे चेहरे के सवाल पढ़कर बिना कुछ पूछे ही जवाब दे दिया, ‘मैडम, मैं गर्ल्स होस्टल की तरफ ही जा रहा हूं, तो आपका सामान भी वही डिलीवर कर देता हूं।‘ फिर उसने सामान से भरा एक बैग उठाया और मेरे साथ होस्टल की तरफ चल दिया। दुकानदार को साथ जाते देख लड़कों ने मेरा पीछा करना छोड़ दिया।

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होस्टल पहुंच कर दुकानदार बोला, ‘मैडम, मैं हर दिन आपको लाइब्रेरी से होस्टल जाते देखता हूं। यहां अक्सर सामान डिलीवर करने आता हूं, इसलिए पता था कि आप यहां रहती हैं। मैंने उन लड़कों को आपका पीछा करते देख लिया था और उनसे किसी बहस में नहीं पड़ना चाहता था, इसलिए बहाने से आपके साथ यहां तक चला आया।‘

यह सब जानने के बाद मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मै उस दुकानदार का शुक्रिया कैसे अदा करूं। उसके जैसा नेक-दिल और दयालु व्यक्ति मुझे आज तक नहीं मिला। ऐसे ही लोग होते हैं, जिनकी वजह से दिल #metoopositive जैसी कहानियों पर विश्वास कर लेता है।

अगर आपके पास कोई ऐसी कहानी है, जिसमें किसी पुरूष ने आपकी मदद की है या आपके सम्मान या मदद के लिये खड़े हुये है, तो आप भी हमारे साथ #metoopositive पहल के तहत अपनी कहानी sendyourstory@stage.thinkright.me पर शेयर कीजिये। चलिए, एक नई सोच से समाज को पॉज़िटिव बनाने की कोशिश करते हैं। सोचो सही, जियो सही।

*लेखिका के अनुरोध पर नाम और जगह को बदला गया है।  

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