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कैसे बनें बेहतर- बच्चे

कैसे बनें बेहतर- बच्चे

  • अपने माता-पिता को समझने का रखें खास ध्यान

पैरेंट्स अपने बच्चों के लिए बहुत कुछ करते हैं, उनकी खुशियों के लिए अपने सुकून से समझौता कर लेते हैं, लेकिन बच्चे कई बार जाने-अनजाने अपने माता-पिता का दिल दुखा देते हैं और उनकी सराहना करना ही भूल जाते हैं, जो बहुत ज़रूरी है। माता-पिता के साथ यदि आप अपना रिश्ता खूबसूरत बनाए रखना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें।

धैर्य रखें

हमारे माता-पिता की उम्र के अधिकांश लोग टेक सेवी नहीं होते, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि उन्होंने ही हमें जीवन में सबकुछ सिखाया है, खाने से लेकर पढ़ने और लिखने तक। साथ ही इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि वह नई चीज़ें सीखना चाहते हैं, बस जल्दी नहीं सीख पातें। 60 की उम्र के बाद उनके लिए पहले जैसा सक्रिय रहना शारीरिक रूप से सक्षम नहीं होता। इसलिए जब हम उनके साथ रहें, तो हमें उनके हिसाब से चलना चाहिए और उनके प्रति सहानुभूति रखने की आवश्यकता है।

उनकी मदद स्वीकार करें

पैरेंट्स के लिए जो चीज़ सबसे बुरी होती है वह इस बात को स्वीकार करना कि उनके बच्चे बड़े हो चुके हैं और उन्हें अब उनकी मदद की ज़रूरत नहीं है। उनके लिए इसे समझना और इसे स्वीकारना बहुत मुश्किल होता है, इसलिए हमेशा अपनी भावनाएं और चिंताएं उनके साथ शेयर करें। हो सकता है आपको लगे कि इससे बेकार में ही उनका तनाव बढ़ेगा, लेकिन सच यह है कि अपने बड़े बच्चे की मदद करना उन्हें अच्छा लगता है, यह मदद इमोशनल, आर्थिक या किसी अन्य रूप में हो सकती है।

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पैरेंट्स को कभी अकेलापन महसूस न होने दें | इमेज : फाइल इमेज

उन्हें अपनापन महसूस कराएं

जब पैरेंट्स देखते हैं कि उनके बच्चे बड़े हो गए और आत्मनिर्भर बन गए हैं, अपने जीवन के फैसले करने लगे हैं और नया परिवार शुरू कर चुके हैं, तो वह अकेलापन महसूस करने लगते हैं। इतने साल जिस बच्चे के साथ बिज़ी रहे, अचानक उन्हें महसूस होने लगता है कि बच्चे को अब उनकी ज़रूरत नहीं है। इस तरह खुद को बेकार समझने की नेगेटिव भावना का उनके मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। ऐसे में ज़रूरी है कि आप उन्हें अकेलापन न महसूस होने दें, खासतौर पर महत्वपूर्ण दिनों के जश्न में उन्हें शामिल करें और उन्हें स्पेशल फील करवाएं।

पैरेंट्स के माता-पिता बनने की गलती न करें

माना कि उम्र होने पर उन्हें अपने कुछ काम में आपकी मदद की ज़रूरत होती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह आप पर पूरी तरह से निर्भर हो गए हैं और उनकी लाइफ को कंट्रोल कर सकते हैं, क्योंकि यदि आप ऐसा करते हैं तो पैरेंट्स का आत्मसम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। याद रखिए कि उन्होंने आपको बड़ा किया है, तो वह अपनी देखभाल खुद करने में सक्षम हैं, बस उन्हें आपकी थोड़ी सी मदद चाहिए।

खुश रहें आप चाहे मानें या न मानें, लेकिन आपके पैरेंट्स ने जो भी किया आपकी खुशी के लिए किया। जब आप कुछ अच्छा करते हैं, तब क्या आपने उनके चेहरे पर खुशी और गर्व की भावना पर ध्यान दिया है। उनके चेहरे पर कुछ ऐसी खुशी होती है जैसे वह खुद चांद पर पहुंच गए हो। कई बार वह चिल्लाते हैं, भला-बुरा कहते हैं, सख्त होते हैं, कई बार वह आपको विलेन की तरह लगे होंगे, लेकिन आखिरकार उनका एक ही मकसद होता है आपकी खुशी। उनकी खुशी आपकी खुशी में ही निहित है।

और भी पढ़िये : क्या आप अपने बच्चे को ‘ज़रूरत से ज़्यादा प्यार’ करते हैं?

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