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खुशहाल और मज़बूत रिश्ता बनाने के 5 उपाय

खुशहाल और मज़बूत रिश्ता बनाने के 5 उपाय

  • रिश्तों को मज़बूत बनाने के लिए विज्ञान ने कुछ टिप्स दिए हैं

रिश्ते ज़िंदगी में उस स्तंभ की तरह होते हैं, जिस पर ज़िंदगी की पूरी छत टिकी हुई होती है। जितना ज़्यादा यह स्तंभ मज़बूत होता है, जीवन उतना ही ज़्यादा खुशियों वाला और लंबे समय तक चलने वाला होता है। जब तक यह स्तंभ सही सलामत होते हैं, दुनिया की कोई ताकत छत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। अगर कोई परेशानी आती भी है, तो यह मज़बूत स्तंभ सब कुछ बड़ी आसानी से संभाल लेते हैं।

कुछ ऐसे ही स्तंभ रिश्तों में मज़बूती लाने के लिए विज्ञान के आधार पर कुछ टिप्स दिए गए है, जो रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद करता है। 

भावनात्मक रिश्ते मज़बूत बनाना

कोई भी रिश्ता शर्तों के आधार पर कायम नहीं किया जा सकता। विश्वास और समर्पण होना बहुत ज़रूरी है। अच्छे रिश्ते और संबंध एक-दूसरे को आज़ादी देते हैं। अगर कोई अपने भावनाओं को साझा करना चाहता है, तो दूसरे का यह फर्ज़ है कि वह उसका पूरा आदर और सम्मान करें। एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और उसे मज़बूत बनाना है।   

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चीज़ों का पॉज़िटिव रखना

खुशहाल जिंदगी का यह मूल मंत्र है कि छोटी-छोटी बातों को दिल से ना लगाएं। अगर रिश्तों में कुछ ऐसा हुआ है, जिसने दुख पहुंचाया है, तो उसे ज़रूर जताएं लेकिन उसके बारे में सोचते न रहें। जो हो चुका उसे जाने दें। हर बात को खुद से जोड़कर न देखें। जब परिवार के अन्य लोग आपकी अनुपस्थिति में आपस में बात कर रहे हो, तो यह ज़रूरी नहीं है कि वे लोग आपके ही बारे में बात कर रहे हों। रिश्तों में शक न करें क्योंकि यही शक आपकी खुशियों और मुस्कुराहट का सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है। अपने रिश्तों को पूरी आज़ादी दें, उन्हें खुलकर सांस लेने दें, जिससे वे स्वस्थ रूप से विकसित हो सकें।

सिर्फ दिल की नहीं, दिमाग से भी सोचें

भावनाओं में बहकर ज़िंदगी हर फैसले नहीं लिए जा सकते, कभी–कभी कुछ चीज़ों के बारे में दिल से नहीं बल्कि दिमाग से सोचना चाहिये। अगर दिमाग से सोचेंगे तो हर बात प्रैक्टिकल होकर सोचेंगे। रिश्तों को मज़बूत बनाने के लिए दिल और दिमाग दोनों की ज़रूरत है। 

बनाए खुशहाल रिश्ते और जीवन

जीवन अनमोल है और उससे भी अनमोल हैं रिश्ते। सभी की कोशिश रहती है कि रिश्तों को स्नेह, प्रेम से सींचते रहें। अपने हमेशा खुश रहें, लेकिन रिश्ते तभी खुशहाल बनते हैं, जब अपनों की जिंदगी में हंसी-मुस्कुराहट बनी रहती है। जीवन हंसते-मुस्कुराते हुए बीतता है। ऐसा तभी मुमकिन है, जब हर रिश्ते में हंसी-ठिठोली शामिल रहे। साथ ही हंसने-मुस्कुराने से रिश्तों में अपनापन और प्यार बढ़ता है और अपनों का जीवन खुशहाल बना रहता है। अपने रिश्तों को जिम्मेदारी या बोझ की तरह न लेकर हंसते और मुस्कुराते हुए निभाएं, फिर देखिए ज़िंदगी कितनी खूबसूरत हो जाएगी।

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