जीवन को अध्यात्म से जोड़ने के 5 तरीके

  • योग, मेडिटेशन के साथ-साथ कई और तरीकों से भी जीवन में आध्यत्म लाया जा सकता है।

अध्यात्म मानव जीवन की सफलता का बहुत बड़ा आधार है। जीवन में बिना अध्यात्म के इंसान सफल नहीं हो सकता, क्योंकि इंसान को आगे बढ़ने के लिए मन में शांति और संतुष्टि का भाव होना बहुत ज़रूरी है। जो सुख और शांति इंसान बाहर ढ़ूंढता है, बल्कि वह हमारे अंदर ही मौजूद होती, बस उसे पहचानने की देर है। जब जीवन में आध्यात्मिक स्तर पर ध्यान दिया जाता है, तब जिम्मेदारी, करूणा और दया जैसे भाव व्यक्ति के मन में उजागर होते हैं।  

योग

योग हमें आध्यात्मिक शक्ति और दिशा प्रदान करता है। योग एक प्रकार से आत्मविद्या का बीज है। योग से इंसान को स्वस्थ, खुशियां, सक्रिय और शक्ति को बढ़ावा मिलता है। योग साधना अपने आप में एक ऐसा रास्ता है, जिस पर चल कर व्यक्ति आध्यात्मिकता के भावों को सही रूप से समझ सकता है। योग केवल योगासन की क्रियाओं का नाम नहीं है। योग तो शरीर और मन को स्वस्थ रखने का एक रास्ता है।

मेडिटेशन और प्रार्थना

ध्यान के जरिये मन-मस्तिष्क को शांति मिलती है और मन-मस्तिष्क में एकाग्रता आती है। वहीं प्रार्थना करने से ऊर्जा मिलती है। ध्यान के दौरान प्रार्थना की जा सकती है। ध्यान से मन को शक्ति मिलती है और पॉज़िटिव ऊर्जा मिलती है। ध्यान के दौरान हम खुद से जुड़ने की कोशिश करते हैं।  प्रार्थना में व्यक्ति भावपूर्ण अपने मन की बात रखता है और मन की परेशानी को दूर करता है। दोनों के ज़रिए इंसान अध्यात्म की ओर जा सकता है।

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किताब पढ़ना

देखा जाए तो, प्रत्येक नई किताब मन में दर्जनों नए विचारों को जन्म देती है। इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग आए दिन तनाव का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में किताब की मदद से आप इस मुसीबत से छुटकारा पा सकते हैं। किताब पढ़ने से व्यक्ति को ध्यान लगाने में मदद मिलता है और जिज्ञासु बनाए रखता है। जब दिमाग पढ़ने में व्यस्त रहता है, तब इधर-उधर की बेकार की बातें सोचना भूल जाता है।

अकेले सफर करना

जब व्यक्ति अकेले कहीं घूमने या सफर करने निकलता है, तो वह अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आकर ऐसे जगह आ जाता है, जहां लोग उसे नहीं पहचानते। अकेले किए गए सफर में वह कई नई चीज़ों का जानता और अनुभव करने लगता है। खुद को आज़ाद और मन में शांति अनुभव करता है। यह भी एक प्रकार का आध्यात्मिक तरीका है, जहां व्यक्ति खुद को समय देता है और मन को शांत करता है।

आध्यात्मिक चर्चा करना

अनजान लोगों के सामने बिना किसी झिझक, डर और आत्मविश्वास के साथ आमने सामने बात करना यानी खुलकर अपने अनुभव और भाव को व्यक्त करते हैं। आध्यात्म के जरिये लोगों से जुड़ने लगते हैं और जिससे नए अनुभव और शांति का एहसास होता है।  

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